क्या मुसीबत है!
बुधवार, २२ अप्रैल २०२०
क्या मुसीबत आन पड़ी
जब से हमारी आँख लड़ी
तुम तो देखती रही खड़ी खड़ी
सजा तो हम पर आ पड़ी।
सूरज की रौशनीजैसा तेज जगमगा रहा
चन्द्रमा की शीतलता जैसा मौसम बना रहा
हम तो सिर्फ देखते हीही रह गए
मन ही मन समा बांधते रह गए।
नादान दिल समज नहीं पाया
बोल दिया जो मन में आया
पर वह इतना सहज नहीं था
वो इत्तेफाक महज नहीं था।
दिन का गुजरना लाजमी था
वो भी एक अच्छा आदमी था
मेरा दिल उस पे तरसता रहा
मेघा भी दिल खोलकर बरसता रहा।
अच्छेदिलवाले मिल ही जाते है
सपने पुरे हो ही जाते है
एक अपना घर बसा देते है
प्रभु की कृपा को अपने दामन में छीपा देते है
हसमुख मेहता
अच्छे दिलवाले मिल ही जाते है सपने पुरे हो ही जाते है एक अपना घर बसा देते है प्रभु की कृपा को अपने दामन में छीपा देते है हसमुख मेहता
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क्या बढिया बात है हसमुख साब, बहुत अछ्छी पोयम है। शुक्रिया।