क्या मुसीबत है! .. Kyaa Poem by Mehta Hasmukh Amathaal

क्या मुसीबत है! .. Kyaa

Rating: 5.0

क्या मुसीबत है!
बुधवार, २२ अप्रैल २०२०

क्या मुसीबत आन पड़ी
जब से हमारी आँख लड़ी
तुम तो देखती रही खड़ी खड़ी
सजा तो हम पर आ पड़ी।

सूरज की रौशनीजैसा तेज जगमगा रहा
चन्द्रमा की शीतलता जैसा मौसम बना रहा
हम तो सिर्फ देखते हीही रह गए
मन ही मन समा बांधते रह गए।

नादान दिल समज नहीं पाया
बोल दिया जो मन में आया
पर वह इतना सहज नहीं था
वो इत्तेफाक महज नहीं था।

दिन का गुजरना लाजमी था
वो भी एक अच्छा आदमी था
मेरा दिल उस पे तरसता रहा
मेघा भी दिल खोलकर बरसता रहा।

अच्छेदिलवाले मिल ही जाते है
सपने पुरे हो ही जाते है
एक अपना घर बसा देते है
प्रभु की कृपा को अपने दामन में छीपा देते है

हसमुख मेहता

क्या मुसीबत है! .. Kyaa
Thursday, April 23, 2020
Topic(s) of this poem: poem
COMMENTS OF THE POEM
Sasikala Kamandula 23 April 2020

क्या बढिया बात है हसमुख साब, बहुत अछ्छी पोयम है। शुक्रिया।

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Mehta Hasmukh Amathalal 23 April 2020

अच्छे दिलवाले मिल ही जाते है सपने पुरे हो ही जाते है एक अपना घर बसा देते है प्रभु की कृपा को अपने दामन में छीपा देते है हसमुख मेहता

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Mehta Hasmukh Amathaal

Mehta Hasmukh Amathaal

Vadali, Dist: - sabarkantha, Gujarat, India
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