क्या काम का?
बुधवार, १५ अप्रैल २०२०
वरना ये दिल क्या काम का?
जो सताये रहे खामखा
जलाने पर तुला है आखिर क्यों?
हम ने क्या क्या नहीं किया उसके खातिर!
वो कहता गया में सुनता गया
सुनके बातोंको गुनगुनाता रहा
सबकुछ मेरा था, पर वो बताता रहा।
अपने कारनामों को बारीबारी कहता रहा।
मेरे को था भरोसा उसपर जान से ज्यादा
पर वो रहा अकड़ू और फिर आमादा
लानेपर तुला था एक और विपदा
क्यों वो करता रहा ऐसा सदा?
मेरे दिल में उठ रहा एक संशय
क्या होगाउसका तर्क और आशय
वो महाशय तो मुझे दे देते है कल्पना
और में करता रहता हु उसकी आराधना।
करने दो उसे अपनी मनमानी
में भी तो हु सदा स्वमानी
नहीं सुनूंगा उसकी एक बात भी
करता रहूंगा कदर अपने आप की।
हसमुख मेहता
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करने दो उसे अपनी मनमानी में भी तो हु सदा स्वमानी नहीं सुनूंगा उसकी एक बात भी करता रहूंगा कदर अपने आप की। हसमुख मेहता