वो थे वहाँ पे, जहाँ थे हम
थे वे बिखरे पड़े, बने के लिए दुनिया की नयी बात।
थी शायद हमसे उन्हें एक आश
करे हम उनकी मदद हाल फिल हाल
पर
हम भी हम हैं जनाब!
ले दिल पत्थर, देखते रहे
सोचा ये उनकी किस्मत थी
देखी ना अपनी करनी थी।
र्चचा कर, तमाशा ख़तम करा
अपना पेट भूखा भर लिया।
किसी ने संवेदना जताई
किसी ने कोध्र
दबी समझदारी इन सबके दबोच।
दोहरेगा सब ये कल भी
कल भी र्चचा बनेगी
होंगी बाते आपकी, हमारी
शायद
बिखरेंगे आप, हम भी, कहीं
शायद
इंतकाल हमारा, आपका भी यूँ होगा
बनेगा लोगों का नया र्चचा ।
कल भी चर्चा ही बनेगी।
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