सी ले लबों को तेरे Poem by M. Asim Nehal

सी ले लबों को तेरे

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सी ले लबों को तेरे
के लफ्ज़ फंदे बनने लगें हैं
बोलने वालों के यहाँ
निशान मिटने लगे हैं

अंध भख्तों के शहर में
भक्ति बड़ी, इंसानियत छोटी हुई है
रख संभाल अपने ख्याल दिल में अभी
वक़्त का तकाज़ा कुछ और है अभी

गवाह है ये ज़मीन
आसमान ने भी देखा है
जिस शख्स ने भी खुदा होने का दावा किया
उसे पत्थर का बूत बना चौराहे पर रखा गया

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M. Asim Nehal

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Nagpur
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