मजबूर तो नहीं थे
सोच लिया करने को किनारा
और भी तो नहीं था कोई चारा
हो गया था में बेसहारा
उपर से रहा बेरुखा वर्तन तुम्हारा
क्या क्या से क्या हो गया?
सपना ही टूट गया
संजोये थे दिल के तार चुनकर
दिल खो गया धड़कन को सुनकर
कभी याद आ भी जाए
मेल फिर भी ना हो पाए
दिल से कर लेना मुश्किल ये समजौता
कैसे होत्ते वो दिन यदि में तुम्हारा होता
क्यों था गुरुर आपको अपने हुस्नपर
न होने देने था हावी उसके अपनेपर
'राज हो या रंक' सभी कहते है प्यार से
'मिले हो तुम हमको' दुआ मांगी थी हमने परवरदिगार से
होना पाया जो हमने और चाहां था दिलसे
अचानक यह क्या गया जो हम पूछ बैठे आपसे?
कर दिया इन्कार आपने बिना सोचे समझे
हम हो गए बेगाने और दिल से उलझे
ढाई अक्षर प्रेमके बस पन्ने पे रह गए
आप तो बस पैगाम इतना पीछे छोड़ गए
वरना हम तो कभी, सोच भी सकते थे
सब कुछ लुटाना तो दूर पर मजबूर तो नहीं थे
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