सपने में रहो हे प्रिया(Malobika) Poem by Arun Maji

सपने में रहो हे प्रिया(Malobika)

Rating: 5.0

सपने में रहो हे प्रिया
बाहु की बँधन में मत आओ।
आप खराब हो जाएंगे
मैं भी खराब हो जाऊंगा।

माता प्रकृति
इंसान की स्पर्श में बलात्कार होती है
प्यार बलात्कार नहीं होगी?

© अरुण माजी

Wednesday, September 4, 2019
Topic(s) of this poem: love,lust
COMMENTS OF THE POEM
READ THIS POEM IN OTHER LANGUAGES
Close
Error Success