मन भी तेरा तन भी तेरा
बुधवार, ८ जनवरी २०२०
मन भी तेरा
तन भी तेरा
रोज होता है दिन मे उजाला
ये सत्य को आज ही जाना। मन भी तेरा तन भी तेरा
मेरे बदन पर छाप लगी है
देशदाज को मोहर लगी है
आज वतन में आग लगी है
मेरे देश को बुरी नजर लगी है। मन भी तेरा तन भी तेरा
हर साख पर उल्लू बैठा है
देश में अफवा खूब फैलाई है
ऐसे समय मे, मेरे दिल मे
थोड़ी सी टीस उठी है। मन भी तेरा तन भी तेरा
कोई तो बताओ
सच को ना जुठलाओ
देश के लोगो, मन को जगाओ
अपने आस्था को प्रकट कराओ। मन भी तेरा तन भी तेरा
देश तुम्हारा बर्बाद होगा
दुश्मनो का दबदबा होगा
आप कहाँ जाओगे ये सोचो?
दूसरे कहेंगे "इनको खूब नोचो"। मन भी तेरा तन भी तेरा
ये जो जला रहे, वो दुश्मन है
अपने देश में खुद कातिल है
देश को उठाना अपना काम है
उनको दिखाना, सबक आज है। मन भी तेरा तन भी तेरा
देश समलेगा अपने बुते पर
टूट पडेगा दुश्मनो पर
ना आंच आएगी, अपनी सरहद
हम कर देंगे दिल से मदद। मन भी तेरा तन भी तेरा
हसमुख मेहता
This poem has not been translated into any other language yet.
I would like to translate this poem
देश समलेगा अपने बुते पर टूट पडेगा दुश्मनो पर ना आंच आएगी, अपनी सरहद हम कर देंगे दिल से मदद। मन भी तेरा तन भी तेरा हसमुख मेहता