मन ही मन
मंगलवार, २१ जनवरी २०२०
"मन" मन ही मन मुस्कुराता है
जब दिल को कोई भाने लगता है
दिल में इक अजीब सी हलचल मचाता है
मन को खूबनचाता भी है।
चंचल मन हजारों कल्पना करता है
मंत्रमुग्ध हो कर अपना जहां बसाता है
अपनी नगरी का वो एक ही राजा होता है
बाकी झुककर सलाम करनेवाला दरबारी होता है।
प्यार को माना पवित्र झरना
उसमे नहीं होता है हारना
बस खुश रहकर मीट जाना
पर अपनी बात से नहीं हटना।
ना कोई बहाना
बस सिर्फ मुस्कुराना
हंसकर ही अपनी ख़ुशी जाहिर करना
और आँखों को कभी नहीं चुराना।
कट जाती है रातें
जब दिल से होती है बातें
सब्र नहीं होता जब होती है मुलाकाते
समय तो यूँही गुजर जाता है बताते बताते
हसमुख मेहता
Hasmukh Mehta welcome DrAnsu Singh 1 Edit or delete this Like · Reply · 1m
कट जाती है रातें जब दिल से होती है बातें सब्र नहीं होता जब होती है मुलाकाते समय तो यूँही गुजर जाता है बताते बताते हसमुख मेहता Hasmukh Amathalal
This poem has not been translated into any other language yet.
I would like to translate this poem
Active Now DrAnsu Singh Hasmukh Mehta जी..आपकी पंक्तियाँ बहुत सुन्दर हैं आदरणीय Hide or report this Like · Reply · See Translation · 2m