मन ही मन... Man Hi Poem by Mehta Hasmukh Amathaal

मन ही मन... Man Hi

Rating: 5.0

मन ही मन
मंगलवार, २१ जनवरी २०२०

"मन" मन ही मन मुस्कुराता है
जब दिल को कोई भाने लगता है
दिल में इक अजीब सी हलचल मचाता है
मन को खूबनचाता भी है।

चंचल मन हजारों कल्पना करता है
मंत्रमुग्ध हो कर अपना जहां बसाता है
अपनी नगरी का वो एक ही राजा होता है
बाकी झुककर सलाम करनेवाला दरबारी होता है।

प्यार को माना पवित्र झरना
उसमे नहीं होता है हारना
बस खुश रहकर मीट जाना
पर अपनी बात से नहीं हटना।

ना कोई बहाना
बस सिर्फ मुस्कुराना
हंसकर ही अपनी ख़ुशी जाहिर करना
और आँखों को कभी नहीं चुराना।

कट जाती है रातें
जब दिल से होती है बातें
सब्र नहीं होता जब होती है मुलाकाते
समय तो यूँही गुजर जाता है बताते बताते

हसमुख मेहता

Monday, January 20, 2020
Topic(s) of this poem: poem
COMMENTS OF THE POEM
Mehta Hasmukh Amathalal 23 January 2020

Active Now DrAnsu Singh Hasmukh Mehta जी..आपकी पंक्तियाँ बहुत सुन्दर हैं आदरणीय Hide or report this Like · Reply · See Translation · 2m

0 0 Reply
Mehta Hasmukh Amathalal 23 January 2020

Hasmukh Mehta welcome DrAnsu Singh 1 Edit or delete this Like · Reply · 1m

0 0 Reply
Mehta Hasmukh Amathalal 20 January 2020

कट जाती है रातें जब दिल से होती है बातें सब्र नहीं होता जब होती है मुलाकाते समय तो यूँही गुजर जाता है बताते बताते हसमुख मेहता Hasmukh Amathalal

0 0 Reply
READ THIS POEM IN OTHER LANGUAGES
Mehta Hasmukh Amathaal

Mehta Hasmukh Amathaal

Vadali, Dist: - sabarkantha, Gujarat, India
Close
Error Success