मन ही है
Monday, September 21,2020
8: 25 AM
मन ही है मुख्य
बातें तो होती है असंख्य
लगता है कभी कभी डंख
पर नहीं होता असर जब बजता है शंख।
मन की बात मन ही जाने
हम तो रहेंगे मन के मतवाले
बन भी सकते है परवाने
यदि लगेंगे दूसरे मनवाने।
हम क्यों कहे मन को?
क्या अधिकार है तन को?
तन अपनी चेष्टा करे!
मन अपनी पराकाष्टा करे।
हम ने एक चीज़ को माना
बाकी तो सब है बहाना
यदि मन है मक्कम
टीचलेगी किसीकी भी तिकड़म।
मन से करो मुकाबला
तन से करा सामना
दोनों का है ये संघर्ष
जरूर होगा आपका उत्कर्ष।
जज्बात को को छूना जोई गुनाह नहीं
किसीकी गुजारिश पर पनाह देनाअमानवीय नहीं
हम तो है मन के अमीर
दिखा देंगे अपना खमीर।
तन से जुड़ा मन
मन से जुड़ा अभिमान
गुरु जरूर हो ना की गुमान
वो जरूर से करा देगा अपमान।
तन से जोड़ो नाता यदि मन को है भाता
ये तो बनता है सोने पे सुहागा
जो नहो जोड़ता वो है अभागा
किस्मत का मारा दुनिया से भागा।
डॉ जाडीआ हसमुख
जो नहो जोड़ता वो है अभागा किस्मत का मारा दुनिया से भागा। डॉ जाडीआ हसमुख
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S. R Chandralekha 👏💕Super 🙏🌿🌹🙏🙏 1 Hide or report this Like · Reply · 8h