मन में आए
Tuesday, August 4,2020
12: 09 PM
मन में आए वो ही है कविता
जल जिस में बहे वो हीहै सरिता
जिस को आप सम्हाल के रखो, वोही है अस्मिता
जो खुलकर दान कर सके, वो ही है दाता।
आप ने सोचा कुछ करने को
दिल ढूंढने लगा बहाने को
फिर आपको याद आया
गीत लिखने का ख्याल आ ही गया।
नहीं था आसान ये तरिका
कैसे बनेगी बेह्तरीन कविता!
में रह गया अपने आप मे सोचता
पर भूलगया अपने आपको रचयिता।
मानो तो ये है मन का समंदर
ले जाती है नाव को बन्दर
मेरा मन भी मजबूर हो उठा
एक कविता का रूप दे बैठा।
मन में प्यार का एक अंकुर फूटा
तारा जमीं पर आके टूटा
मन हु ना विचलित ये सोचकर
जाना तो है संब को, सब कुछ यहां छोड़कर।
मन औरदिल हो उठा प्रफुल्लित
अंकुरे भी हो उठी नवपल्वित
ना कोई कारण था, होना चिंतित
हो गई कविता ऐसे ही कल्पना कथित
डॉ. जाडीआहसमुख
S. R Chandralekha, 👏👏बहुत ही सुन्दर रचना 💯👏 आप की कविता " मन में आए " पर सावन की डंडी फुहार है, बारिश की बूँद की सुरम्य संगीत है, मन में उत्साह की लहर है, जहाँ हम चार मिले वही कविसम्मेलन है। एस आर चन्द्रलेखा ४.८.२०२० 1 Hide or report this Like · Reply · See translation · 2h
ना कोई कारण था, होना चिंतित हो गई कविता ऐसे ही कल्पना कथित डॉ. जाडीआ हसमुख
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S. R Chandralekha, 👏👏बहुत ही सुन्दर रचना 💯👏 आप की कविता " मन में आए " पर मैं ने भी कुछ लाईन लिखने की हिम्मत जुटाई हूँ सर। मन से जो निकले वही कविता है, जहाँ से बहे शीतल धारा वही सरिता है, जहाँ से हम गुजर जाये वही हमारी दुनिया है, जहाँ मिले दो हाथ वही हमारी ताकत है, जहाँ पनपे प्यार वही मानवता है। Like · Reply · See translation · 2h