मौन को अपनाओ
Saturday, May 12,2018
11: 14 AM
कुछ ऐसे संयोग आ जाते है
तो मौन धारण करना ही उचित है
समय के विपरीत रुख करने सेनुक्सान ही होता है
मन में बैचेनी और ग्लानि का अनुभाव होता है।
मन में बहुत भाव उमड़ते है
उद्वेग और चिड़पन से झगड़ा हो जाता है
सालों का रिश्ता पलभर में ख़त्म हो होता है
राख के ढेर में हमें कुछ नहीं मिलता है।
मौन को अपनाओ
मन को ढाढस दिलाओ
अपनी लूली जबान को बस में कर दो
अन्यथा मुसीबत को दावत दे दो।
"मौन और जबान" एक ही सिक्के के दो पहलु है
जबान कोई भी भाषा में हो, समज आ जाती है
आँखों के भाव उसे दर्शा जाते है
आदमी सुनकर, आगबबूला हो जाता है
समय का तकाजा है कि, अपना खुद सोचो
दूसरों को अपनी और खींचो
बनाओ रिश्ते और तालमेल रखो
समयकी नजाकत को देखकर स्वाद चखो।
बिगड़ा खेल है, तो सुधार लो
अपनी गलती है, तो मान लो
खींचातानी करने से, नुक्सान ही होगा
लाभ या हानि तो समय ही बतलाएगा।
हसमुख अमथालाल मेहता
बिगड़ा खेल है, तो सुधार लो अपनी गलती है, तो मान लो खींचातानी करने से, नुक्सान ही होगा लाभ या हानि तो समय ही बतलाएगा। हसमुख अमथालाल मेहता
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