में नहीं हो सकती .. Me Poem by Mehta Hasmukh Amathaal

में नहीं हो सकती .. Me

Rating: 5.0

में नहीं हो सकती
Sunday, September 20,2020
4: 48 AM


में नहीं हो सकती तेरी पसंद
होता रहेगा हमेशा द्वन्द
तेरे मेरे बीचारों का कोई मेल नहीं
संसार एक सागर है कोई खेल नहीं।

तूने कहा,मैंने मान लिया
अपने दिल को आहिस्ता पूछ भी लिया
"ये क्या बदतमीज़ी है" वो मेरे पर गुर्रा उठा
अपनी आवाज कोबुलंद कर बैठा।

ऐसी क्या बात है उस मे?
क्यों जल्ला रहे है मुज़ पे?
मैंने धीरे से जानना चाहा
दिल कराह उठा " नहीहै वो मेरा मनचाहा "

में उसे नाराज नहीं कर सकती
उसकी बात को टाल नहीं सकती
मान लो कल कुछ गलत हो गया!
मेरा तो मान लोसबकुछलूट गया

मन का मेल खूब जरुरी
उसमे रखना है सुबुरी
यदि जीवन रखना है तालमेल?
तो सोचो दिल सेतो लाओ फिर उकेल।

आपने मुज़ में अच्छा साथी देखा
अपने जीवन का सपनादेखा
में भाग्यशाली हूँ की आपने इस कदर समजा
और बहुत ही बड़ा दिया दर्जा।

डॉ जाड़िआ हसमुख

में नहीं हो सकती .. Me
Saturday, September 19, 2020
Topic(s) of this poem: poem,september
COMMENTS OF THE POEM
Mehta Hasmukh Amathalal 19 September 2020

में भाग्यशाली हूँ की आपने इस कदर समजा और बहुत ही बड़ा दिया दर्जा। डॉ जाड़िआ हसमुख

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Mehta Hasmukh Amathaal

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