मेरे दिल में...Mere Poem by Mehta Hasmukh Amathaal

मेरे दिल में...Mere

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मेरे दिल में
मंगलवार, ३० जुलाई २०१९

बसी हो मेरे दिल में
बस यूँही आते रहना
चिडयों की तरह चहकना
और मुस्कुराते रहना।

सपनो में भी आते रहना
अपने प्यार को ताजा बनके रखना
बस गुनगुनाते रहना
हर पल ना जुदा होना।

सोचना ही अपने बस में है
आगे कुछ नहीं होता है
दिल में दर्द छुपा रहता है
ना किसीको कहते बनता है।

बस एक बार ही देखा है
वो ही तस्वीर बसा के रखा है
मानते है मिलता वो ही है
जो भाग में लिखा होता है।

हमें नहीं पता, प्यार क्या होता है
बस दिल में कुछ कुछ होता है
दिल की धड़कने यूँ ही बढती रहती है
चाहत की भी इम्तहानलेती है।

हमारा हाल बस नहीं पूछो
कोई क्यों आ के आंसुओं को पोंछे?
बस यही हाल तो रहना है!
हमें अपने आप को सम्हालना है।

हसमुख मेहता

मेरे दिल में...Mere
Tuesday, July 30, 2019
Topic(s) of this poem: poem
COMMENTS OF THE POEM

সাহনিন সুলতানা Excellent 1 Delete or hide this Like · Reply · 3h

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S.r. Chandrslekha Delete or hide this 1 Like · Reply · 2h

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हमारा हाल बस नहीं पूछो कोई क्यों आ के आंसुओं को पोंछे? बस यही हाल तो रहना है! हमें अपने आप को सम्हालना है। हसमुख मेहता Hasmukh Amathalal

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Mehta Hasmukh Amathaal

Mehta Hasmukh Amathaal

Vadali, Dist: - sabarkantha, Gujarat, India
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