मोहपाश के तीर
बुधवार, २० मई २०२०
क़त्ल तो नहीं किया
पर छलनी कर दिया
ये दिल जिस ने उसे प्यार किया
उसे अपने मोहपाश में जकड लिया।
नही दी कोई आहट
बस दिखा दी अपनी झुंझलाहट
मुंह तो मानो ऐसे बना दिया
जैसे कातिल से सामना हो गया।
जाते जाते शमा के दीप जला गए
मुहोब्बत की एक जलक दिखा गए
" खैरियत से तो हो" पूछकर आग मे घी डाल गए
हाल तो अच्छे थे पर बेहाल कर गए।
मुझे नहीं पता ये अदाएं क्या होती है?
लोग कहते है ये ये मोहपाश के तीर चलती है
अच्छे शूरवीर भी इसमें घायल हो जाते है
उसकी खूबसूरती के कायल हो जाते है।
हमें तो आता है जल जाना
बस मकसद एक ही है पाना
या तो वो जताए अपनी ओर से!
या तो इजाजत दे मर्जी से।
ना क़त्ल हो या क़त्ल का इल्जाम हो
बस इंताजारी का आलम तमाम हो
मिले और सपने साकार करे
अपने आपको स्वयं प्यार का इकरार करे
हसमुख मेहता
ना क़त्ल हो या क़त्ल का इल्जाम हो बस इंताजारी का आलम तमाम हो मिले और सपने साकार करे अपने आपको स्वयं प्यार का इकरार करे हसमुख मेहता
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welcome ashok kumar 1 Edit or delete this Like · Reply · 1m