मुझे लिखने दे
शनिवार, २८ मार्च २०२०
मेरे दर्दभरी दास्ताँ को सुनाने दे
मेरे दिल के झज्बातोके लिखने दे
तू जाने क्या है उसके मायने?
क्यों हो गए अपने पराए?
जितने मेरे करीब थी
उतनी ही दूर हो गई
माना के कुसूर मेरा ही था
गम में मुझे डूबना ही था।
ना दे तु मुझे इतनी सजा
एक बार तो मुखड़ा दिखा जा
तेरे बातों में दम जरूर है
मुझे भी गम उतना ही है।
छोड़ा गया तीर वापस नहीं आता
बोलागया वचन लिया नहीं जाता
मे गम के सागर में डूबा हुआ हूँ
पछतावा मन सेकर रहा हूँ।
मेरी लिखी हुई बातों में
और गुजरी हुई रातों में
फुरसत से गम को पढ़ लेना
माफ़ी भी दिल से दे देना।
मैंने लिखा है साफ़ तन से
पछतावा भी कर लिया है मन से
अब पीछे का ना पूछना आगे का सोचना
दिलसे मुझे माफ़ ही करना।
हसमुख मेहता
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मैंने लिखा है साफ़ तन से पछतावा भी कर लिया है मन से अब पीछे का ना पूछना आगे का सोचना दिलसे मुझे माफ़ ही करना। हसमुख मेहता Hasmukh Amathalal