ना होगी आखिरी
मंगलवार, १७ मार्च २०२०
ये रात ना होगी आखिरी
कसौटी होगी खरी खरी
वतन में मर जाए हम घडी घडी
आखिरी सांस तक लड़ी।
नो सोचा था उन्होंने
जल जाएंगे परवाने
हिम्मत के मतवाले
देश पर मर मिटनेवाले।
आज भी हम खड़े है
अपनी शान से अड़े है
देश की खातिर हम मिट जाएंगे
ना आंच कभी आने देंगे।
हमने रख दिया है सर
कोई ख़तरा ना आने देंगे वतन पर
ऐसी कुर्बानी हम देंगे
वतन की शान ना मिटने देंगे।
हर रात हमारी राह देखेगी
सूरज की किरणे राह दिखाएगी
कभी ना होने देंगे शान में गुस्ताखी
सर कुचल देंगे जो रखते है तुमाखी।
भरोसा रखना अय देशवालों
धीरे से सोचो ओ चेनवालो
शांति और चेन फलसफा हमारा
ये वतन तुम रहो प्यारा हमारा।
हसमुख मेहता
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भरोसा रखना अय देशवालों धीरे से सोचो ओ चेनवालो शांति और चेन फलसफा हमारा ये वतन तुम रहो प्यारा हमारा। हसमुख मेहता