Hasmukh Amathalal

Gold Star - 383,587 Points (17/05/1947 / Vadali, Dist: - sabarkantha, Gujarat, India)

ना बदले आह में.. Naa Badle Aah Me - Poem by Hasmukh Amathalal

ना बदले आह में

जमाना हो गया आपको मिले हुए
फिर भी लगता नहीं आप है बिछड़े हुए
हो सतकता है आप हमें जानते ही नहीं
पढ़ें है की आप की याद कभी भूले नहीं।

शायद सप ने सुहाने होते है
रातें भी रंगीन होती है
चांदनी भी रूप बिखेरती है
चाँद भी हँसता कमाल दिखाकर

सूरत भरी है सादगी से
चेहरा छलकताहै दीवानगी से
कुछ तो है मन में आपके जो सता रहा है
बारबार आप के दुःख कोो जता रहा है

न कहो कुछ भी हमें, फिर भी मालूम रहता है
दर्द छलके आँखों में फिर भी हंस्ता रेह्ता है
मानो आप थक गयी हो मंझिल को पाकर
हम भी ना पूछ पाते है दिल से बोझिल होकर

खुश रहे अपने मकाम पर तुम सदा
यही हम प्रार्थना का रहे ओ खुदा
ना आये को विघ्न आपकी राह में
कोई भी ख़ुशी ना बदले आह में

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Poem Submitted: Friday, January 22, 2016



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