ना वेर ना नफरत
शुक्रवार, २० दिसंबर २०१९
माँ के चरण में शीश झुकाए
हमेशा रखे शुख्कामनाए
न रखे मन में वेर या नफरत
कभी ना हो हमारी ऐसी फितरत।
हम रहे सदा वतन के परवाने
उसकी शान में मर मिटनेवाले
ना हो उसकी शान में कोई गुस्ताखी
बस हमने यही रेखा को खींची।
भगवान ने सुन्दर धरती बनाई
आप के सुख के लिए दे दी दुहाई
आप नही करना है कोई भी जुदाई
रहे हम भिन्न
पर खाते एक अन्न
सब का एक है आशियाना
पर फिर क्यों हो जाते हम बेगाना।
धरती हमारी माँ है
हम उसके प्यारे बच्चे है
एक ही धागे से बुने है
सब अपने, अपनेतो है।
जीना यहां, मरना यहाँ
इसके बिना जाना कहाँ
माँ के दुलार ने, हम को यही सिखाया
कुछ कर जानेको दिल ने मन बनाया।
हसमुख मेहता
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जीना यहां, मरना यहाँ इसके बिना जाना कहाँ माँ के दुलार ने, हम को यही सिखाया कुछ कर जानेको दिल ने मन बनाया। हसमुख मेहता