नहीं खोना है.. Nahi Poem by Mehta Hasmukh Amathaal

नहीं खोना है.. Nahi

नहीं खोना है
रविवार, ३० दिसम्बर २०१८

हर चीज को हमें तबज्जू देना है
और आरजू करना है
पता नहीं कौन हमारा मददगार हो जाए!
हमें अपना ले और हमारा जो जाए।

हमें नहीं मालुम
कौन सही है और कौन हमदम
हमें तो बस फिकर लगी रहती है हरदम
कौन बनेगा दोस्त और कौन बनेगा सनम?

समय की पहचान नहीं
किसीकी की दरकार नहीं
किसी तरह की पहचान का कोई आकार नहीं
और है भी तो कोई स्वीकार नहीं।

समय जाते देर नहीं लगती
समझने में कई साल लग जाते
जब समज आ जाए तो वक्त गुजर जाता है
मन ही मन फिर ग्लानि भर देता है।

समय रहते सबकुछ करना है
अपनों को समजना है
गैरों को भी अपनाना है
और जो अपने है उनको कभी नहीं खोना है,

हसमुख मेहता

नहीं खोना है.. Nahi
Saturday, December 29, 2018
Topic(s) of this poem: poem
COMMENTS OF THE POEM
Mehta Hasmukh Amathalal 03 January 2019

समय रहते सबकुछ करना है अपनों को समजना है गैरों को भी अपनाना है और जो अपने है उनको कभी नहीं खोना है, हसमुख मेहता

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Mehta Hasmukh Amathalal 03 January 2019

welcome sreelekha mistry

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Mehta Hasmukh Amathalal 03 January 2019

Shreelekha Mistry Very nice thanks 1 Hide this Like · Reply · 4d

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Mehta Hasmukh Amathaal

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Vadali, Dist: - sabarkantha, Gujarat, India
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