नहीं कोई रास्ता
मंगलवार, ३ सितम्बर २०१९
राम कहो या रहीम कहो
उसकी किरपा बरसती रहो
एक दूसरे के हमदम बनना
साथ में रहकर आगे चलना।
दूर से सुनाए राम का घोष
क्रोध का हो जाए नामशेष
से ही रहेगा सब में शेष
मानव जाट है सब में विशेष।
उसके नाम पर ना हो दंगा
क्यों लेना सब से पंगा
आतम में लीन हो जाओ रंगा
सब हो जाएगा बाद मे चंगा।
हम ने जाना एक ही प्रीत
ये है मानवजात की रीत
प्रेम बढ़ाए, बढ़ती गंगा
उसमे घुलता स्नेह अनोखा।
हम साया है दिल को भाया
फिर काहेको मन में छाया
द्वेष राग से मिल जाए मुक्ति
सब की दिलोमे रहे जाए भक्ति।
सुख मिलेगा,
दिल को भाएगा
दुःख जो देगा, दुःख मिलेगा
फिर नहीं रास्ता, यदि पछताएगा।
हसमुख मेहता
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