पानी बेहता रहेगा.. Pani Poem by Mehta Hasmukh Amathaal

पानी बेहता रहेगा.. Pani

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पानी बेहता रहेगा
शुक्रवार, ६ दिसंबर २०१९

डरना उसकी फितरत है
लेकिन हमें तो जरुरत है
जीना है ना हमें घुट-घुटकर
कदम होंसलो के साथ आगे बढ़ना है।

रही जमाने की बात
तो हम जागेंगे सारी रात
ना सोचेंगे कल क्या हुआ था?
पर सोचेंगे आज क्या करना है!

हमें जीना आता है
पर ड़र नहीं सताता है
दिल तो मानता है
पर चिंता जरूर कराता है।

हम ना कोसेंगे
यदि ना भी मिल पाओगे
किश्ती पे जरूर सवार होंगे
पर उनको जरूर याद करेंगे।

हमारा ये वादा रहा
और मने भी सदा कहा
दिल से ना कभी जुदा करेंगे
पास होने पर सदा कहा मानेंगे।

ये है हमारी हसरतें
ना हो कभी उसमे कोई शर्ते
कारवां तो चलता रहेगा
नदी में पानी सदा बेहता रहेगा।

हसमुख मेहता

पानी बेहता रहेगा.. Pani
Saturday, December 7, 2019
Topic(s) of this poem: poem
COMMENTS OF THE POEM
Mehta Hasmukh Amathalal 07 December 2019

ये है हमारी हसरतें ना हो कभी उसमे कोई शर्ते कारवां तो चलता रहेगा नदी में पानी सदा बेहता रहेगा। हसमुख मेहता Hasmukh Amathalal

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Mehta Hasmukh Amathaal

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Vadali, Dist: - sabarkantha, Gujarat, India
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