परिवार... Parivar Poem by Mehta Hasmukh Amathaal

परिवार... Parivar

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परिवार
बुधवार, ६ फरवरी २०१९

अच्छा परिवार और बड़ा नाम
पर हो रहे बहुत बदनाम
देश के लिए कुर्बानिया दी
और देश को आजादी भी दिला दी।

पर आजकल सब बदल गया
अपनी विरासत पर बट्टा लगा दिया
पैसे के बलबूते वो राजनीती कर सकते है
पर अपने पर लगा धब्बा नहीं मिटा सकते।

उनके कितने ही सहयोगी सलाखों के पीछे है
अंधे की तरह लगाईं है दौड़ पैसो के पीछे
आज नाम बहुत बदनाम हो गया है
मानो लुटेरों का गिरोह बन गया है।

जो लोगों के पास लाख रूपये जुटाने को नहीं थे
वो आज अरबो, खरबो में खेलने लगे है
विदेशों मेंसंपत्ति रखी और बंगले ख़रीदे है
सख्ती होनेपर विदेशो में स्थायी होने की फ़िराक में रहते है।

उनका नाम उछलनेपर कोई शर्मिंदगी नहीं
मंदिरो में जाकर बंदगी करते सभी
समय आनेपर अपने को कुछ भी साबित कर देंगे
कुर्सीके लिए कुछ भी करने को राजी होंगे।

हसमुख मेहता

परिवार... Parivar
Wednesday, February 6, 2019
Topic(s) of this poem: poem
COMMENTS OF THE POEM
Mehta Hasmukh Amathalal 06 February 2019

उनका नाम उछलनेपर कोई शर्मिंदगी नहीं मंदिरो में जाकर बंदगी करते सभी समय आनेपर अपने को कुछ भी साबित कर देंगे कुर्सी के लिए कुछ भी करने को राजी होंगे। हसमुख मेहता

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Mehta Hasmukh Amathaal

Mehta Hasmukh Amathaal

Vadali, Dist: - sabarkantha, Gujarat, India
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