प्रभु आन बसो... Prabhu Poem by Mehta Hasmukh Amathaal

प्रभु आन बसो... Prabhu

प्रभु आन बसो
Saturday, January 9,2021
7: 13 AM


प्रभु आन बसो मेरे घट मे
बस एक ही रट लगी है मन में
तेरे चरणों में गुजारु सारा जीवन
प्रभु रखिओ मेरी ख्वाइश सजीवन।

सारी उम्र माया संग कटी
पैसा, ऐश्वर्य जुटाने में लगी
फिर ऐसा ज्ञान हुआ की
मन विचलित हो उठा।

माया, मोह दिल उबाने लगा
मन को इसका रंज लगा
क्यों बिता दी मैंने अपनी जिंदगी?
बिना किए प्रभु की बंदगी!

अब तो तेरे चरणों में बितानी
अपनी बची-कुची जिंदगानी
मैंने की बहुत सी नाफरमानी
अब ना करनी कोई बेईमानी

सर मेरा तेरे चरणों में नमे
ना इधर-उधर किसी बात घूमे
बस अब तो एक ही है खेवना
घट में एक ही हो प्रभावना।

प्रभु तोरे धाम में मुझे मिले शक्ति
मन से हट जाय सदा अशान्ति
जीवन मेरा सफल हो जाए
भवसागर के चंगुल में ना फस जाए।

डॉ जाड़ीआ हसमुख

प्रभु आन बसो... Prabhu
Sunday, January 10, 2021
Topic(s) of this poem: january
POET'S NOTES ABOUT THE POEM
प्रभु आन बसो
COMMENTS OF THE POEM
READ THIS POEM IN OTHER LANGUAGES
Mehta Hasmukh Amathaal

Mehta Hasmukh Amathaal

Vadali, Dist: - sabarkantha, Gujarat, India
Close
Error Success