प्रेम बढ़ता रहेगा..Prem Poem by Mehta Hasmukh Amathaal

प्रेम बढ़ता रहेगा..Prem

Rating: 5.0

प्रेम बढ़ता रहेगा
Friday, December 6,2019
10: 08 AM

जरुरत के बिना जीवन अधूरा
प्यार तो है जीवन की धुरा
उसके बिना इंसान कभी नहीं समला
भले ही होता रहा हमला।

ज़माना बदला
पर नहीं बदला
प्यार का ढंग
वो ही रहा बलिदान रंग।

अपनी दुनिया मे रहेते लोग मस्त
कभी नहीं होने देते सूरज को अस्त
अजीब मिजाज और अजीब दास्ताँ
नहीं होने दी हालत खस्ता।

प्यार नहीं एक मार्गी रास्ता
ना होने देना उसे सस्ता
वो आपकी जरुरत हो सकती है
पर वो बाजार में नहीं बिकती है।

यदि उसमे कमी आ भी जाए
और आप रहो सताए
मन को कह देना चुपचाप
नहीं होना चाहिए कोई संताप।

प्यार की कोई कदर करे या ना करे
बात चाहकर करे या ना करे
जीने का फक्र होना चाहिए
मन में ग्लानि का कभी भाव नहीं होना चाहिए

मिला जो पेम स्नेह से
उसे समलो दिल से
ना करो एतराज किसी अंदाज़ से
बस सफर करो उसी जहाज़ से।

बसर हो जाएगा जिंदगी का सफर
यदि आप रहे सच्चे मुसाफिर
यही चीज़े होती रहेगी बारबार
प्रेम हमेशा रहेगा सदाबहार।

हसमुख मेहता

प्रेम बढ़ता रहेगा..Prem
Saturday, December 7, 2019
Topic(s) of this poem: poem
COMMENTS OF THE POEM
Mehta Hasmukh Amathalal 07 December 2019

बसर हो जाएगा जिंदगी का सफर यदि आप रहे सच्चे मुसाफिर यही चीज़े होती रहेगी बारबार प्रेम हमेशा रहेगा सदाबहार। हसमुख मेहता Hasmukh Amathalal

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Vadali, Dist: - sabarkantha, Gujarat, India
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