पूरा देश
शुक्रवार, ११ जनवरी २०१९
पूरा देश आज स्तब्ध रह गया
जब उच्च न्यायालय ने दूसरी तारीख दिया
सालों से आस्था का झगड़ा यूँही लटकता रहा
दोनों धर्मो के बिच की खाई बढ़ाता रहा।
यदि यह बात दूसरे देश मे होती
ना जाने कितनी ही बर्बादी हो जाती
कितने ही निर्दोषों की जान चली जाती
कोर्टो को ये बात शायद समज में नहीं आती।
यह बात सुविदित है की आततातयो ने झुलम ढाया
मंदिर का ढांचा मनमाने ढंग से गिराया
जब लोगो ने बहुत हायतोबा मचाया
तो राजकीय पार्टिओ ने खूब दिलासा दिया।
"हम राममंदिर वही बनाएंगे" का नारा गुंजा
जाहिर जनता ने भी दोहराया मंसूबा
कितने ही कारसेवको ने बलिदान दिया
पर समाधान अभी तक नहीं हुआ।
अदालत के रुख से शायद हालत बदल जाय
होनी-अनहोनी के कगार पर देश खड़ा हुआ है
ये करोडो देशवासिओं की माँग है
भगवान् राम का मंदिर उसी जगह पर बन जाए।
हसमुख मेहता
This poem has not been translated into any other language yet.
I would like to translate this poem
हम राममंदिर वही बनाएंगे का नारा गुंजा जाहिर जनता ने भी दोहराया मंसूबा कितने ही कारसेवको ने बलिदान दिया पर समाधान अभी तक नहीं हुआ। अदालत के रुख से शायद हालत बदल जाय होनी-अनहोनी के कगार पर देश खड़ा हुआ है ये करोडो देशवासिओं की माँग है भगवान् राम का मंदिर उसी जगह पर बन जाए। हसमुख मेहता