प्यार के नाम
शुक्रवार, ६ जुलाइ २०१८
में तो थक गयी
सोचते सोचते सो गई
में कहाँ से कहाँ पहुँच गई
प्यार की गालियां मानो पीछे ही छूट गई।
वक्त ही नहीं रहा
मुंह से निकल गया "आहा"
सब कुछ हो गया स्वाहा पलकभर में
आंसू उभर आए आँखों में।
दर्दएक जरिया सा बना
प्रेम को एक सदमा सा लगा
पाँव लड़खड़ा रहे थे
आसमान निचे और धरती ऊपर लग रही थी।
अब लौटना आसान नहीं था
प्यार का जज्बा मर चुका था
मुझे अब डर सा लग रहा था
दिल भी अंदर से कांप रहा था।
में स्वगतबोल उठी
बदन में सिहर सी उठी
में बोल पड़ी अनजाने में
दर्द भी छलक पडा गाने में।
अब तो में नहीं चाहती
नसीब को भी नहीं मानती
अच्छा होना होगा तो अभ भो हो सकता है
प्यार के नाम एक और कलगी दे सकता है।
हसमुख अमथालाल मेहता
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अब तो में नहीं चाहती नसीब को भी नहीं मानती अच्छा होना होगा तो अभ भो हो सकता है प्यार के नाम एक और कलगी दे सकता है। हसमुख अमथालाल मेहता