तुम थक जाओगे ग़लत काम करते करते... Poem by Rajan T Renganathan

तुम थक जाओगे ग़लत काम करते करते...

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तुम थक जाओगे ग़लत काम करते करते
मैंने सच्चाई का मार्ग चुना है, बाद मुश्किलों के

नहीं सोता शैतान चैन की नींद कभी
आग से बना है आग ही फैलता है

मन का चोर नित नए आयाम खोजता है
और मौका मिलते ही चुरा लेता है सारा सामन

सब जान कर भी मै अनजान बना रहता हूँ
भरोसा जो किया है सर्वशक्तिमान पर

जब हिसाब खुलेगा सब राज़ खुल जायेंगे
किसने दोस्ती की किसने दुश्मनी बनायीं

समय रहते सद्द-भुद्धि आ जाये तो जानो
जीवन सफल हुआ और चारो धाम मिल गए

Monday, May 15, 2023
Topic(s) of this poem: introspection
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