बेहद किया है प्यार मैंने तुमको ए मेरे सनम
तुमने क्यों समझा ना इसको
क्यों आँखों ने कर दिए सितम
डाली डाली फूल फूल ने सुन लिए देखो मेरे सितम
पलकें ये कई बार झुकी और आँखों ने भी कहा कई बार
कैसे तुम ना समझ सकी, कैसे मैं चूका हर बार
चलो लबों से कह देता हूँ और खत भी लिख देता हूँ
इज़हार ना करने का तुम कोई इलज़ाम ना देना
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