राख के पुतले
सोमवार, ८ जुलाई 2019
ओ राख के पुतले
तूने जाना है अकेले
जितना चाहे मजा ले ले
फिर अकेला मंजिल की और उड़ ले।
यहाँ किसी की भी नहीं चलती
सब की हो जाती है बोलती
उसकी लाठी सब पर चल जाती
वो किसीको भी नहीं छोड़ती
तुम कितनी भी कोशिश करलो
अपने आपको सुप्रत भी करदो
होना है वो होके ही रहेगा
आपको यहां के यहां ही भुगतना पडेगा।
मन्नत करो पर अपने कर्म से
कभी नहीं मिल पाएगा धर्म से
सिर्फ प्रभुशरण ही नहीं है रास्ता
सच का उसमे हमेशा रहता है वास्ता
मन रखो साफ़
देते रहो सब को इन्साफ
ना दुखाओ किसीका दिल
सब के साथ रहो धुलमिल
इन्साफ का तराजू रहेगा आपके पक्ष में
सिर्फ मशगूल रहो अपने लक्ष में
किसीका बुरा ना चाहो
बस उसी का नाम रटते ही रहो।
हसमुख मेहता
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इन्साफ का तराजू रहेगा आपके पक्ष में सिर्फ मशगूल रहो अपने लक्ष में किसीका बुरा ना चाहो बस उसी का नाम रटते ही रहो। हसमुख मेहता Hasmukh Amathalal