राधा बेचारी Poem by ramesh rai

राधा बेचारी

राधा बेचारी
प्रेम की मारी
प्रेम की जननी
सिखाया सृष्टि को
प्रेम का दर्शन
तभी तो महादेव
सती के वियोग में
किया तांडव नृत्य
दिया अणु विस्फोरन का सूत्र
कैसे ऊर्जा उत्सर्जित होती
डमरू के निनाद से
लेकिन राधा आज भी बेचारी
ढूँढती है कण कण में कान्हा को।

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@ Ramesh Rai
09/8/2026

Sunday, August 9, 2026
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