प्रणय गीत। Poem by ramesh rai

प्रणय गीत।

तुम प्रणय गीत गाओ
तुम रस माधुरी छलकाओ
तुम्हारी अधरों की छवि
सदा दिल में मैं बसाऊं।

तुम्हारी नयनों की छवि
अपनी नयनों में बसाऊं
तुम्हारी मंद मंद मुस्काने
अपने होठों पर लाऊं।

तुम्हारे आत्मा की छवि
अपने दिल में बसाऊं
तुम्हारी पलकों की पंखुड़ियां
बन्द करती मेरी छवि।

तुम्हारे प्रणय गीत के हिलोरे
कैसे मै छवि बनाऊं।

Created on 23/9/2025
All rights reserved
@ Ramesh Rai

COMMENTS OF THE POEM
READ THIS POEM IN OTHER LANGUAGES
ramesh rai

ramesh rai

howrah
Close
Error Success