तुम प्रणय गीत गाओ
तुम रस माधुरी छलकाओ
तुम्हारी अधरों की छवि
सदा दिल में मैं बसाऊं।
तुम्हारी नयनों की छवि
अपनी नयनों में बसाऊं
तुम्हारी मंद मंद मुस्काने
अपने होठों पर लाऊं।
तुम्हारे आत्मा की छवि
अपने दिल में बसाऊं
तुम्हारी पलकों की पंखुड़ियां
बन्द करती मेरी छवि।
तुम्हारे प्रणय गीत के हिलोरे
कैसे मै छवि बनाऊं।
Created on 23/9/2025
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@ Ramesh Rai
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