ऋण है मुझपर
मैंने जिया जिया
तेरे बिना जी लिया
यादों के सहारे
किस्मत की बहारें।
जब तूने छोड़ दिया
मैं राह से भटक गया
तूने बेसहारा कर दिया
मैंने मन अपना मार दिया
मन को में कोसत्ता
फिर रहता मनाता
ढाढ़स को बंधाता
मानता विधाता।
हम दोनों जी रहे थे
आसमान के नीचे थे
उनको पसंद ना आया
उसको उठा लिया।
में रहा मारा मारा
हो गया बेसहारा
किसीने ना हाल जाना
में हो गया बेगाना।
मेरा सफर रह गया
मुझे अकेला छोड़ गया
किसी की याद में रोया
भीड़ में, जहीद में खो गया।
लोग कहे संसार
नहीं उसमे कोई सार
पर जीते है हम बारबार
उसके गुणहै मुझपर अपार।
welcome manisha mehta 1 Manage Like Like Love Wow · Reply ·
लोग कहे संसार नहीं उसमे कोई सार पर जीते है हम बारबार उसके गुणहै मुझपर अपार।
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mehta binit mehta 1 Manage Like · Reply · 5m Hasmukh Mehta Hasmukh Mehta welcoem purvi mehta 1 Manage Like Like Love Wow · Reply · 5m