साथ चलना है
शुक्रवार, २५ सितम्बर २०२०
कहीं दिप जले कहीं दिल
अब तो मुज से आके मिल!
नहीं कटते रात और दिन
बज नहीं पाती मेरी बिन।
मुझे अंधेरों से लगता डर
तू बसी है दिल के अंदर
बिन तेरे पाँव बढ़ते नहीं
मन को सुकून देते नहीं।
तूने कहा था "हम फिर मिलेंगे"
सारे जहां को अपना बनाएंगे
साथ रहेंगे, साथ मरेंगे
एक दूसरे से अलग नहीं होंगे।
भर दे मेरे जीवन में ऊझाला
दिल हो गया था मेरा काला
उजाले से मानो दूर हो गया
तूने आकर दिप जलाया।
तेरे बिना अब चैन कहाँ!
तू है जहां बस मेरा डेरा वहां
ले चल मुझे जहां तेरा दिल करे?
दिल अब तो बस एक माला जपे।
तेरे बिना उसपार जाना मुश्किल
छोड़ नहीं सकता में आज को कल
नैया पर सवार होकर हमें चलना है
बाकी जीवन सुख से साथ बिताना है।
डॉ जाडीआ हसमुख
Poem: 59255546 - साथ चलना है.. Saath Member: Rajnish Manga करने वालों की परवशता है ज्ञात किसे, जितनी हमको? कह तो सकते हैं, कहकर ही कुछ दिल हलका कर लेते हैं, उस पार अभागे मानव का अधिकार न जाने क्या होगा! इस पार, प्रिये मधु है तुम हो, उस पार न जाने क्या होगा!
हरिवंशराय बच्चन की कुछ पंक्तियाँ उद्धृत करना चाहता हूँ: प्याला है पर पी पाएँगे, है ज्ञात नहीं इतना हमको, इस पार नियति ने भेजा है, असमर्थबना कितना हमको, कहने वाले, पर कहते है, हम कर्मों में स्वाधीन सदा, करने वालों की परवशता है ज्ञात किसे, जितनी हमको? कह तो सकते हैं, कहकर ही कुछ दिल हलका कर लेते हैं, उस पार अभागे मानव का अधिकार न जाने क्या होगा! इस पार, प्रिये मधु है तुम हो, उस पार न जाने क्या होगा!
नैया पर सवार होकर हमें चलना है बाकी जीवन सुख से साथ बिताना है। डॉ जाडीआ हसमुख
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Poem: 59255546 - साथ चलना है.. Saath Member: Rajnish Manga Comment: हरिवंशराय बच्चन की कुछ पंक्तियाँ उद्धृत करना चाहता हूँ: प्याला है पर पी पाएँगे, है ज्ञात नहीं इतना हमको, इस पार नियति ने भेजा है, असमर्थबना कितना हमको,