Hasmukh Amathalal

Gold Star - 482,701 Points (17/05/1947 / Vadali, Dist: - sabarkantha, Gujarat, India)

सब का सुख... sab ka sukh - Poem by Hasmukh Amathalal

सब का सुख हमारा ध्येय है

ना कोई हमारे वचन से दुखी हो
ना कोई हमारे आचरण से खिन्न हो
हम स्वयं मे एक अहिंसा के पुजारी बने रहे
बगिया में फूल हमेशा खिले रहे।

किसी का जीवन मिटाना हमारा काम नहीं
बुरा वर्ताव करना हमारे स्वाभाव में नहीं
हम कामना करे उन जीवों की रक्षा के लिए
जो हरदम मरते है हमारे भोजन के लिए

बुरा वर्ताव करना हमारे स्वाभाव में नहीं
हम कामना करे उन जीवों की रक्षा के लिए
जो हरदम मरते है हमारे भोज के लिए
कई हमलोग विलाप करते है स्वजन के लिए?

रक्षा करे मन से और पार्थी रहे
भगवान सुब को सुखी रखें
जिन धर्म बना इस लिए है
सब का सुख हमारा ध्येय है


Comments about सब का सुख... sab ka sukh by Hasmukh Amathalal

  • Mehta Hasmukh Amathalal (4/2/2015 8:46:00 PM)


    Krishna Kumar right
    16 hrs · Unlike · 1

    Hasmukh Mehta welcome Swati pandey
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  • Mehta Hasmukh Amathalal (4/2/2015 8:45:00 PM)


    Purvi Mehta likes this.

    Hasmukh Mehta.......welcome
    Just now · Unlike · 1
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Poem Submitted: Wednesday, April 1, 2015



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