सच बात है यही।
दूर रहकर भी दिल में बसे रहो
बालों को भी युही सहलाते रहो
हवा को हम कह देंगे, बस आप दूर रहो
हम सुनते रहे कुछ मन में, आप बस कहते रहो।
नियत हमारी पहले भी बहुत अच्छी थी
अपनी जोड़ी सलामत रहे वो भी इच्छी थी
ना हो पाया हमारा मिलन, वो बात कुछ अजीब थी
ये कहानी अमीर की नहीं पर एक गरीब की थी ।
किसी को बदनाम करने की हम सोचे क्यों?
किसी की राह का रोड़ा हम बने क्यों?
न कर सके उजाला किसीकी दुनिया में
अँधेरा क्यों फैलाये, उजाड़ का क्यो सोचे उसकी बगिया में?
हम दुखी है मनसे, पर जताया नहीं करते
सुख क्या होता है उसी का जिक्र भी नहीं करते
जो होता है, ओर आगे भी होगा, हम दिल से लगाया नहीं करते
जो हो गया है उसी पे संताप नहीं करते।
'वो जहाँ भी हो बस खुश ही हो ' ये कामना रखते है
' बाकी रहा कुछ भी मन में 'तिलांजलि करते है
'सुख की कामना करना' बंदिश कहीं भी नहीं है
'बस मनोमन खुश रहे' ख्वाइश इतनी सी है।
'यदि कुछ जबान ने कह दीया गलती से '
आफत आ जाएगी बिन बिनती से
वो न हम चाहेंगे, जीवनभर या सदाके लिए
दुआ के लिए हमेशा उठेगा। ये हाथ आपके लिए।
ना सो पाता हूँ रातभर, यह सोचकर
जीवन हो ना जाये किसी तरह दूभर
तुम वहां और में यहाँ अपनी जगह
ख़ुशी से रहे ये रहा हमारा दिली आग्रह।
ना मिल पाने का, हमें अफसोस नहीं
आप को ना आए थोड़ी सी खरोच कहीं भी
मिलना या बिछड़ना हमारे हाथ नहीं
'कामना करना दिल से' सच बात है यही।
Shujat Ahmad and Raju Patel like this. Hasmukh Mehta welcome Just now · Unlike · 1 today
Sheetal Mehta So nice papa! ! ! beautifully crafted poem! 1 hr · Unlike · 1
welcome inder mohan and anwar khan Just now · Unlike · 1
Shujat Ahmad and 3 others like this. Hasmukh Mehta welcome sulkhan mashal, vasundhra jangir suthar and sita ram Just now · Unlike · 1 today
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Seen by 1 Keshav Kumar likes this. Keshav Kumar Very nice lines sir 11 hrs · Unlike · 1 today