सफल हो जाती... Safal Poem by Mehta Hasmukh Amathaal

सफल हो जाती... Safal

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सफल हो जाती
Tuesday, December 3,2019
9: 28 AM

जब मुझे लगता है
तुम में शक्ति है
तो चुप हो जाना पड़ता है
मन को शांत रखना पड़ता है।

रेल की पटरी पर
दो पहिए साथ-साथ पर
कभी नहीं मिलते
फिर भी चलते रेहते।

यही है दस्तूर
किसी में नहीं है कुसूर
फिर भी पुराते सुर
बाजु में रखकर गुरुर।

जब भी मैंने चाहा
तूने मुझे सराहा
इसलिए में चुप हो जाता
और सोचता रेहता।

किसी का चुप हो जाना ही अच्छा
जब कोई अपने कौशल से जा जाता
में मन ही मन सराहता
और खुश हो जाता

यही है जीवन
जो आकर देता सपने सजीवन
प्राण फुक देते जिंदगी
सफल हो जाती तुम्हारी बंदगी।

हसमुख मेहता

सफल हो जाती... Safal
Tuesday, December 3, 2019
Topic(s) of this poem: poem
COMMENTS OF THE POEM
Mehta Hasmukh Amathalal 03 December 2019

यही है जीवन जो आकर देता सपने सजीवन प्राण फुक देते जिंदगी सफल हो जाती तुम्हारी बंदगी। हसमुख मेहता

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Mehta Hasmukh Amathaal

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Vadali, Dist: - sabarkantha, Gujarat, India
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