सहर्ष अपनाए
हो सकता है
मेरा नजरिया ही गलत है
में सोचता हूं वो नहीं होगा
अपनेपन का एहसास नहीं होगा।
जो हो रहा है उसमें उसकी मर्जी होगी
मेरी जिंदगी में कठिनाईया आती रहेगी
जो सरल दीखता है वो कठिन हो जाएगा
पछतावे के अलावा कोई विकल्प ही बचेगा।
ये तो उधार की जिंदगी है!
आपने सिर्फ करना बंदगी है
उपरवाले पर सब छोड़ देना है
दुःख हो या सुख, उसे ही अपनाना है।
कई शतकगुजर गए है
पर हम वहीँ के वही है
ना हम समझना चाहते है
और नाहीं अपनाते है।
वो कभी आपकी नही होगी
आपको उसकी आदत डालनी होगी
जैसे सुबह और सवेरा होता है
वैसे ही जीवन में ठीक अंधेरा और उजाला होता है।
किसी पशोपेश में ना पड़े
अपनी लड़ाई खुद लड़े
संघर्ष करे और पसीना बहाए
जो भी उसे सहर्ष अपनाए।
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