सजीवन काव्य... Sajivan Poem by Mehta Hasmukh Amathaal

सजीवन काव्य... Sajivan

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सजीवन काव्य
शक्रवार, २२ मार्च २०१९

मेरा काव्य है सजीवन
यही तो है जीवन का हेतु
हम भाग रहे किसी और दिशा में
मन में बहुत सारी मंशा लिए।.

वो जीवन है नर्क समान
जिस में ना हो आत्मसन्मान
बड़ो के लिए आदर और मान
और हमेशा हो जाते "मान न मान में तेरा महेमान"

जिस में मन की अभ्व्यक्ति ना हो
दिल को छूने वाली व्यक्ति ना हो
जिस में दर्द ना छिपा हो
आदमी थका थका और बूढ़ा हो।

कविता ला देती जान
कर देती आत्मा को सजीवन
जीवन का अर्थ समजाती
असली मायनो में पथदर्शक बन जाती।

हो सकता है जीवन में कठिनाई हो
बहुत सारीरुसवाईयाहो
हर पल दुखभरा है
पर जीवन फिर भी अच्छा है यदि भाईचारा हो

हसमुख मेहता

सजीवन काव्य... Sajivan
Friday, March 22, 2019
Topic(s) of this poem: poem
COMMENTS OF THE POEM
Mehta Hasmukh Amathalal 22 March 2019

Eden S T rinidad 8 mutual friends 1 Edit or delete this Like · Reply · 1m

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Mehta Hasmukh Amathalal 22 March 2019

welcome Annie Garcia 8 mutual friends 1 Edit or delete this Like · Reply · 1m

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Mehta Hasmukh Amathaal

Mehta Hasmukh Amathaal

Vadali, Dist: - sabarkantha, Gujarat, India
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