सजीवन काव्य
शक्रवार, २२ मार्च २०१९
मेरा काव्य है सजीवन
यही तो है जीवन का हेतु
हम भाग रहे किसी और दिशा में
मन में बहुत सारी मंशा लिए।.
वो जीवन है नर्क समान
जिस में ना हो आत्मसन्मान
बड़ो के लिए आदर और मान
और हमेशा हो जाते "मान न मान में तेरा महेमान"
जिस में मन की अभ्व्यक्ति ना हो
दिल को छूने वाली व्यक्ति ना हो
जिस में दर्द ना छिपा हो
आदमी थका थका और बूढ़ा हो।
कविता ला देती जान
कर देती आत्मा को सजीवन
जीवन का अर्थ समजाती
असली मायनो में पथदर्शक बन जाती।
हो सकता है जीवन में कठिनाई हो
बहुत सारीरुसवाईयाहो
हर पल दुखभरा है
पर जीवन फिर भी अच्छा है यदि भाईचारा हो
हसमुख मेहता
welcome Annie Garcia 8 mutual friends 1 Edit or delete this Like · Reply · 1m
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Eden S T rinidad 8 mutual friends 1 Edit or delete this Like · Reply · 1m