समाधान....Samadhan Poem by Mehta Hasmukh Amathaal

समाधान....Samadhan

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समाधान
सोमवार, १९ अगस्त २०१९

तेरी याद दिल से कैसे मिटाऊं
अपने प्यार को सबके सामने कैसे जताऊ
ना रहा जाए या ना सहा जाए
मन ही मन घुटन महसूस होए!

वो दिन थे ओर सुनहरे पल
नहीं सोचा क्या होगा कल?
पल बीतता गया और मजदीक आ गया
"बिछडने"का गम मन को सता गया।

नहीं हो रहा कोई समाधान
बस हो रहा दिल में घमासान
नहीं लगता कोई उकेल आसान
बस तो नया पार करे भगवान्।

दिल की मुराद पार हो
सब चिंता ऐ दरकिनार हो
प्रभु की कृपा अपरम्पार हो।
दुःख का कोई नामोनिशान न हो।

मुझे मेरे प्यार पर है गुमान
नहीं बनने दूंगा जीवन सुमसान
सब की सुखाकारी बनी रहे
हमपर कोई भी छाया ना बने।

हसमुख मेहता

समाधान....Samadhan
Monday, August 19, 2019
Topic(s) of this poem: poem
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Mehta Hasmukh Amathaal

Mehta Hasmukh Amathaal

Vadali, Dist: - sabarkantha, Gujarat, India
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