समझौता
रविवार, १२ अगस्त २०१८
सौतन से भी समझौता कर लुंगी
पर तुम्हे जाने नहीं दूंगी
हर बात मुझे मंजूर है
दासी करने सेवा, हजूर के लिए हाजिर है।
जब दिल से तुम्हे मान लिया
और अपने में समां लिया
तो सौतन क्या मलान क्या रखना?
बस तुम्हारा ही है ख्याल रखना।
कोई भी शर्त मंजूर है
बास आपने हमसे दूर नहीं जाना है
अपनाना और इज्जत दिलाना है
जग को हमारी दीवानगी को दिखाना है।
प्यार से कोई कोई खिलवाड़ नहीं
आँखों से दिखनेवाली बनावट भी नहीं
बस सीधी सी बात और ना कोई टक्कर
जीएंगे साथ साथ जमकर।
प्यार का सौदा महंगा नहीं
उसमे किसी भी जातका अडंगा भी नहीं
प्यार में नाही कोई सौदा और नहीं वादा खिलाफी
बस हमें करना है सिर्फ इंसाफ़ी।
हम कोई ऐसीवैसी शख्सियत नहीं
प्रेम की तो खसियत है यही
एक दुसरे पर मर मिट जाना
और समय आनेपर कुर्बान हो जाना।
हसमुख अमथालाल मेहता
This poem has not been translated into any other language yet.
I would like to translate this poem
हम कोई ऐसीवैसी शख्सियत नहीं प्रेम की तो खसियत है यही एक दुसरे पर मर मिट जाना और समय आनेपर कुर्बान हो जाना। हसमुख अमथालाल मेहता