सपने.. Sapne Poem by Mehta Hasmukh Amathaal

सपने.. Sapne

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सपने
मंगलवार, ३० जुलाई २०१९

तेरी याद मुझे सतावे
सपनो में भी याद लावे
मे सोचु सपनों के बारे
मेरी नाव लगे ना पारे।

तू ना बोली, बस चलदी
ना मुड़ी, ना पलटी
मुझे बात लगी उल्टी
फिर भी लगी अच्छी।

मेरी रब से एक है विनती
पर उसे कोई नहीं सुनती
आज मौक़ा मिला है
मिटाना आज गीला है।

दिल ने भी ये चाहा है
मन बड़ा मतवाला है
बस मिल जाए तो खुशिया मनाना है
सब को अपना बनाना है।

मकसद तो पूरा होगा
सपना भी सच होगा
अरमान मेरे दिल के
पुरे होंगे सज धज के।

हसमुख मेहता

सपने.. Sapne
Tuesday, July 30, 2019
Topic(s) of this poem: poem
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मकसद तो पूरा होगा सपना भी सच होगा अरमान मेरे दिल के पुरे होंगे सज धज के। हसमुख मेहता Hasmukh Amathalal

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Mehta Hasmukh Amathaal

Mehta Hasmukh Amathaal

Vadali, Dist: - sabarkantha, Gujarat, India
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