सपनों का तोल ...Sapno Poem by Mehta Hasmukh Amathaal

सपनों का तोल ...Sapno

Rating: 5.0

सपनों का तोल
गुरूवार, ३ सितम्बर २०२०

सपनों का तोल नहीं
जीवन में उसका मोल नहीं
जो हो गया सच तो ख़ुशी पार नहीं
जो ना हुआ तो दुखा अम्बार सही।

सपने को रखो अपने से ऊपर
बढ़ ते जाओ अपने पथपर
ना करना गीला
यदि मौक़ा ना मिला।

अपनों को ना खोना
सपनो को संजोना
जीवन में मेहनत से हल को जोतना
फिर फल के बारे मे सोचना।

जिनके सपने असल और संगीन
उनकी महफ़िल होगी रंगीन
जीवन के रंग में ख़ुशी लाएगी
सुख के सपनों को सजाएगी।

सपने नही तो आशा नहीं
जीवन जीने की चाह नहीं
सफल हो जाओगे तो आगे बढ़ोगे
सफलता के कदम चूमते रहोगे।

यही तो जीवन यही तो मकसद
यही तो आशा नही तो रुखसद
कहलाओगे मानद महाशय
यही तो होगा जीवन का आशय।

डॉ जाड़िआ हसमुख

सपनों का तोल ...Sapno
Wednesday, September 2, 2020
Topic(s) of this poem: poem
COMMENTS OF THE POEM
Mehta Hasmukh Amathalal 02 September 2020

कहलाओगे मानद महाशय यही तो होगा जीवन का आशय। डॉ जाड़िआ हसमुख

0 0 Reply
READ THIS POEM IN OTHER LANGUAGES
Mehta Hasmukh Amathaal

Mehta Hasmukh Amathaal

Vadali, Dist: - sabarkantha, Gujarat, India
Close
Error Success