सरेआम अवहेलना
Thursday, May 3,2018
9: 37 PM
दिल को सम्हालना बहुत ही मुश्किल
उसका कैसे लाना उकेल?
मन में हो उलझन और तड़प
हाथ ने भी हो कम्पकम्प
मन को लगे आह्लादक
क्योंकी उसकी अदा है मोहक
मन लुभावन और ललचावे
समय आनेपर रुलाए
दिल तो पहलेसे ही था पागल
सदा रेहता उसमे मशगूल
क्या ना क्या सोचता रहता
कैबाट तो कहने भी ना रहता
प्रेम तो प्रभु की भेंट
कई बार दे देती चोट
दिल के आरपार निकल जाती
मोत को भी बुलावा दे देती
सब लोग प्यार को मान नहीं देते
प्रेम को बदनाम और नालेशी भी दे देते
प्रेम को वासना का रूप देते
सरेआम अवहेलना करते और दोष भी दे देते
सब लोग प्यार को मान नहीं देते प्रेम को बदनाम और नालेशी भी दे देते प्रेम को वासना का रूप देते सरेआम अवहेलना करते और दोष भी दे देते Hasmukh Amathalal
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