सर पर घाघर.. Sarpar Poem by Mehta Hasmukh Amathaal

सर पर घाघर.. Sarpar

Rating: 5.0

सर पर घाघर
रविवार, ५ अप्रैल २०२०

सर पर रखकर घाघर, छम्मक छम्मक चाली
तू है भाग्यशाली उसे मिली ऐसी घरवाली
दोस्त ने दी मुझे ताली, ताली पर ताली
मेरे दिल ने मनाई दिवाली, आ गई खुशहाली।

तू है वाकई सच में, फूलों की रानी
सब की चहेती घर मेंमेरे दिल की पटरानी
मेरी जिंदगी में भर दी, खुशियों से हैरानी
में चाहूँ सबको मिले, मेरे सरीखीरानी।

उसने भर दी घर में, जीवनभर की खुशियां
उसने कमाल कर दी, दूर हो गई कमियां
उसको मैंने माना, सही मायनो में सजनी
उजाला बन के आई रात में रजनी।

ऐसी भार्या सबको, मन चाही मिल जाए
जीवन के सुख में, रंग सब घुल जाए
ना रहे सपना अधुरा, रहे हाथ में धुरा
जीवन ऐसे कट जाए, संसार रहे हरा।

में तो हूँ नसीबवाला
जीवन में आया उझाला
तू है बड़ा दयालु, हरदम मेरा रखवाला
सर मे ऐसे झुकाऊँ, उपकार तेरा माना।

हसमुख मेहता

सर पर घाघर.. Sarpar
Sunday, April 5, 2020
Topic(s) of this poem: poem
COMMENTS OF THE POEM
Mehta Hasmukh Amathalal 05 April 2020

S. R Chandralekha Very artistic picture 1 Hide or report this Like · Reply · 10m

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Mehta Hasmukh Amathalal 05 April 2020

S. R Chandralekha Beautifully knitted words Took me to top of the world. Very interesting write dear poet ❤️ 1 Hide or report this Like · Reply · 1m

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Mehta Hasmukh Amathalal 05 April 2020

welcoem s r chandrslekha 1 Edit or delete this Like · Reply · 1m

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Mehta Hasmukh Amathalal 05 April 2020

में तो हूँ नसीबवाला जीवन में आया उझाला तू है बड़ा दयालु, हरदम मेरा रखवाला सर मे ऐसे झुकाऊँ, उपकार तेरा माना। हसमुख मेहता

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Mehta Hasmukh Amathaal

Mehta Hasmukh Amathaal

Vadali, Dist: - sabarkantha, Gujarat, India
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