शरमा गई
सोमवार, १० फरवरी २०२०
में तो खुद ही शरमा गई
अपने आप में ही समा गई
ना कर सकी उँचा सर अपना
मानो में बह गई जमना में ।
मुझे नहीं पता था
प्रेम में इतना पागलपन था
बस मन ही मन सोची रहती थी
सपनो की दुनिया में राचती रहती थी।
सच कहूं तो नहीं मानोगे
बस यूँही रुलाते रहोगे
अपना ही रूतबा झाड़ते रहोगे
मेरी एक भी ना सुनोगे ।
खेर! आपकी मरजी
हमने तो हामी भर दी
बस ले जाओ साथ अपनी दुनिया में
लपेट लो उसी की माया जाल में
मैंने तो सागर पा लिया
पुरे समंदर का मजा ले लिया
बस पालिया जहाँ सारा
संसार हो गया सब मेरा।
मुझे और क्या चाहिए?
एक अच्छा साथी समझनेवाला चाहिए
जो मेरे को ले जाए अपनी दुनिया में
सवार होकर चले हम एक ही नैया में।
हसमुख मेहता
आभार: एस. आर।चंद्रसलेखा
S.r. Chandrslekha 👏👏👏 Sir you are great, What a wonderful poem Sir. 1 Hide or report this Like · Reply · 3h
मुझे और क्या चाहिए? एक अच्छा साथी समझनेवाला चाहिए जो मेरे को ले जाए अपनी दुनिया में सवार होकर चले हम एक ही नैया में। हसमुख मेहता आभार: एस. आर।चंद्रसलेखा
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DrNavin Kumar Upadhyay Hide or report this 1 Like · Reply · 21m