Shayari Page 5 Poem by Sankhajit Bhattacharjee

Shayari Page 5

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दोस्त कहां पर मिलेगा।
खुद के बारे में सोचता हुआ इंसान अब यह पूछेगा।
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सुख रोता है कब्रस्तान में, शांति जलती है श्मशान में।
छुपाओ खुद को, किसी के साथ मिलो मत, संक्रमण सांस में।
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जिंदगी में अगर बड़ा बनना है, तो उतना ही चालाक बनो जितना ईमानदार हो।
नहीं तो दूसरा कोई आ के छीन लेगा तुम्हारी ज़मीन और खा जायेगा तुम्हारी छाँह।
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जिंदगी में हम लोग खेलने आए हैं, यहाँ ट्रॉफ़ी सबको नहीं मिलती ।
सिर्फ खेल का मज़ा लो, हार जीत एक साथ रहती ।
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खून की नदी बहती, मार का बदला मार।
नेतागिरी राजनीति छेड़ती हैं मुहब्बत और प्यार।
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जो लोग क्राइम करते हैं, उनके दिमाग ख़राब हैं ।
आप शादी करो या नहीं भी करो, हालत हमेशा बुरी हैं।
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क्रिमिनल बनते नहीं, बनाया जाता है।
क्राइम का ठिकाना जेल और क्रिमिनल का पागलख़ाना ही गंतव्य होता है।
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कभी कभी दिमाग में ट्रैफिक जाम लग जाता।
बिगड़ा हुआ सिगनल पकड़ता हालत को और वक्त ट्रैफिक पुलिस का काम करता।
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COMMENTS OF THE POEM

Sher- shayari is characterised by concentrating on one subject at a time and figuratively accentuates the poetic standards by the use of tropes. May I suggest you to deal only on one subject in each your poems, dear poet?

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