Shikayaten Hazaar Karte Poem by Ahatisham Alam

Shikayaten Hazaar Karte

कभी तन्हाई में तुम साथ होते हो
कभी दिल की गहराई में तुम साथ होते हो
हक़ीक़त में इतना दूर न होते
तो शिकायतें हज़ार करते
तुम अगर मजबूर न होते
तो शिकायतें हज़ार करते

मेरी ख्वाहिशों की फिकर किसे
मेरे हाले दिल की खबर किसे
सिर्फ हम ही तुमपे मर मिटें तो क्या
अगर तुम भी हमसे प्यार करते
तो शिकायतें हज़ार करते

कभी किसी को देखकर हमसफर समझ बैठे
कभी कुछ क़दम साथ चलकर हमसफर समझ बैठे
मगर ऐ आलम तू अब भी न समझा
अगर वो अपने होते तो क्यों तुम इंतज़ार करते
हक़ीक़त में इतना दूर न होते तो शिकायतें हज़ार करते

Tuesday, March 15, 2016
Topic(s) of this poem: love
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