सोते रहो
सोमवार, १५ जुलाई २०१९
धोलो अपने मुख को
और सोचो अपने सुख को
नही मिलता सुख सभी को
जो दिल से चाहता है उसको।
चेहरा तो धूल जाएगा
पर मेल नहीं धूल पाएगा
देख लो अपनी सूरत आईने मे
निकालो उसके मायने अपने अंदाज मे
थके हुए हो थोड़ा सा नहा लो
अपने आप को तनहा से बचा लो
ताजगी तो फिर भी आ जाएगी
सोचने पर मजबूर कर के जाएगी।
न कर ना अपनों से दिल्लगी
मिलती रहेगी सदा उनकी खफ़गी
ना बचा पाओगे अपनी ख़ुशी
सदा जलते रहोगे और सोचोगे करनी खुदकशी।
कर के तो देखलो
अपने आपको बचालो
खुश रहो और ख़ुशी देते रहो
नींद भी आ जाएगी और सोते रहो।
हसमुख मेहता
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कर के तो देखलो अपने आपको बचालो खुश रहो और ख़ुशी देते रहो नींद भी आ जाएगी और सोते रहो। हसमुख मेहता Hasmukh Amathalal