सोते रहो.. Sote Poem by Mehta Hasmukh Amathaal

सोते रहो.. Sote

Rating: 5.0

सोते रहो
सोमवार, १५ जुलाई २०१९

धोलो अपने मुख को
और सोचो अपने सुख को
नही मिलता सुख सभी को
जो दिल से चाहता है उसको।

चेहरा तो धूल जाएगा
पर मेल नहीं धूल पाएगा
देख लो अपनी सूरत आईने मे
निकालो उसके मायने अपने अंदाज मे

थके हुए हो थोड़ा सा नहा लो
अपने आप को तनहा से बचा लो
ताजगी तो फिर भी आ जाएगी
सोचने पर मजबूर कर के जाएगी।

न कर ना अपनों से दिल्लगी
मिलती रहेगी सदा उनकी खफ़गी
ना बचा पाओगे अपनी ख़ुशी
सदा जलते रहोगे और सोचोगे करनी खुदकशी।

कर के तो देखलो
अपने आपको बचालो
खुश रहो और ख़ुशी देते रहो
नींद भी आ जाएगी और सोते रहो।

हसमुख मेहता

सोते रहो.. Sote
Monday, July 15, 2019
Topic(s) of this poem: poem
COMMENTS OF THE POEM

कर के तो देखलो अपने आपको बचालो खुश रहो और ख़ुशी देते रहो नींद भी आ जाएगी और सोते रहो। हसमुख मेहता Hasmukh Amathalal

0 0 Reply
READ THIS POEM IN OTHER LANGUAGES
Mehta Hasmukh Amathaal

Mehta Hasmukh Amathaal

Vadali, Dist: - sabarkantha, Gujarat, India
Close
Error Success