में सुखी हूँ
शनिवार, १९ जून २०२०
कौन कह सकेगा " में सुखी हूँ "
कौन दिल से कहेगा " में दुखी हूँ "
सब अपने आपसे असंतुष्टहै
मनोरोगी है और शरीर से कुष्ट है।
जितनी जिंदगी में तेजी आई
जीवन में दुःख की मानो आंधी आई
जीवन में सब चीज़ की कमी महसूस होने लगी
जिंदगी मेह्फूज़ होने सेदूर होने लगी।
ना धन काम आता है
ना मन में सुख का अनुभव होता है
जिनगी मानो दल-दल में फँसी जा रही हो
अपने आप को मानो डरा रही हो।
ऐसे में सच्चा दोस्त ही मार्गदर्शक बन सकता है
गुरु जीवन का फलसफा समझा सकता है
आपकी चिंता को साझा कर सकता है
और जीवन के बोझ को हल्का कर सकता है।
जीवन के एक पुष्पहार है
और भगवान का उपहार है।
अपने को हार नहीं मानना है।
पर तारणहार का गुणगान करना है।
जीवन को हारकर गंवाना
और ना समझकर बोज को वहन करना
समय आनेपर कायरता दिखाना
और जीवन डोरको समाप्त कर देना
हसमुख मेहता
welcome Jonah Salvador 1 mutual friend 1 Edit or delete this Like · Reply · 1m Like · Reply · 16m
Harshad Gosai Harshad Gosai Very true poem... 1 Delete or hide this Like · Reply · 16m
जीवन को हारकर गंवाना और ना समझकर बोज को वहन करना समय आनेपर कायरता दिखाना और जीवन डोर को समाप्त कर देना हसमुख मेहता
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