Sulag Raha Kyun Sansaar Hai Poem by Pushpa P.

Sulag Raha Kyun Sansaar Hai

सुलग रहा संसार क्यो अब?

charo or छाया हा हiकार है
पल में बदलेगी किसकी दुनिया
इसका ना कोई ऐतबार है

हो रही रक्त रंजित धरा
आसमा पर धुवें का गुब्बार है

अंत हीन है युद्ध बिगुल ये
चीर कानो को भरता मन में भय,
अशांति का विश्व में साम्राज्य है

कुछ की ज़िद और कुछ की अकड़न
कर रही मानवता पर कुठाराघात है
एक इंसा करे शुरू युद्ध बिगुल पर
इससे पिसता सब संसार है

दृश्य करून देख देख कर
मन मेरा करे ये सवाल है
क्या शांति से निकल नहीं सकता?
किसी भी समस्या का समाधान है

महाभारत होते कान्हा ना रोक पाये
ऐसा ही लंका युद्ध का भी इतिहास है
दानव बन जाता जब मानव
तब तब लिखा गया ऐसा ही इतिहास है

चलो मित्रो परम पिता परमात्मा से करे गुहार हम
थम जाये ये बर्बादी का आलम
और हो विश्व में चैन और अमन
जी सके हरकोई शांति से जो सबका अधिकार है

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